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india news in hindi : दिल्ली में अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग मामले में 11 मई को आएगा फैसला

नई दिल्ली (New Delhi), 10 मई . सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच दिल्ली और केंद्र सरकार (Central Government)के बीच अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े विवाद के मामले पर 11 मई को फैसला सुनाएगी. इस बेंच में शामिल जस्टिस एमआर शाह 15 मई को रिटायर हो रहे हैं. कोर्ट ने 18 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार (Central Government)ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) से कहा था कि स्वतंत्रता से पहले जब संविधान लागू नहीं हुआ था, उस समय संविधान सभा ने कहा था कि यह राष्ट्रीय राजधानी है और किसी राष्ट्र को उसकी राजधानी द्वारा जाना जाता है. इसलिए दिल्ली की विशेष जिम्मेदारी होनी चाहिए. केंद्र सरकार (Central Government)की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि हम यह नहीं कह रहे हैं कि नौकरशाही को केंद्र के प्रति वफादार होना चाहिए, लेकिन केंद्र के पास नियंत्रण और उनका संज्ञान होना चाहिए.

उन्होंने दिल्ली सरकार के उस तर्क पर सवाल उठाया था, जिसमें कहा गया कि जब एक बार जब कोई अधिकारी मंत्रालय में तैनात हो जाता है तो उसे यह बता दिया जाता है कि कौन सी रिपोर्ट देनी है और कौन सी फाइल भेजनी है, यह सही नहीं है. मेहता ने कहा था कि यूनियन सर्विस, यूनियन पब्लिक सर्विस और यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन यह सब आल इंडिया सर्विस के नियम के तहत आते हैं. यहां सवाल राष्ट्रीय राजधानी का है.

दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील शदान फरासत ने कहा था कि अगर दिल्ली सरकार कोई अस्पताल बनाती है तो उसके लिए पद भी सृजित करने की जरूरत होगी. तब चीफ जस्टिस ने मंत्रियों के पद के बारे में पूछा था. तब फरासत ने कहा था कि स्थिति इतनी खराब है कि स्पीकर सचिव की नियुक्ति नहीं कर सकते. दिल्ली सरकार की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि यह दिल्ली सरकार और एलजी के बीच सिर्फ अधिकार और शक्तियों के बंटवारे का विषय नहीं है, बल्कि एक दूसरे के अधिकार क्षेत्र में दखल देने का भी मुद्दा है. दिल्ली सरकार के पास अधिकार होने से ही अधिकारी दिल्ली की जनता और सरकार के प्रति जवाबदेह होंगे. नौकरशाह को सरकार और मंत्रिमंडल के प्रति जवाबदेह और जिम्मेदार होना चाहिए, क्योंकि अंत में विधायिका ही जनता के प्रति जिम्मेदार है.

कोर्ट ने यह मामला 6 मई, 2022 को 5 जजों की संविधान बेंच को रेफर कर दिया था. इससे पहले 14 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने दिल्ली में अफसरों पर नियंत्रण के मसले पर जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने अलग-अलग फैसला सुनाया था, इसलिए इस मसले पर विचार करने के लिए बड़ी बेंच को रेफर कर दिया गया.

/संजय/प्रभात

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Compiled: jantapost.in
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