jagannath puri rath yatra

puri rathyatra : रथ यात्रा के दिन करें यह काम, होगा धन लाभ

Religion

puri rathyatra  : रथ यात्रा कब है (rath yatra kab hai) किसी दिन है तो आपको बता दें 2022 में रथ यात्रा एक शुक्रवार आषाढ़ शुक्ला द्वितीया को है, अर्थात् गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन तो आषाढ़ शुक्ल द्वितीया इसे यात्रा है भगवान की जो यात्रा निकलने वाली है अब उस दिन वैसे ही विषय में यात्रा क्यों निकाली जाती है क्यों निकलती है उसकी जो ऐतिहासिक कथा है पौराणिक कथा है हमारे शास्त्रों में उसकी जो कथाएं हैं वो बहुत सारी कथाएं हैं  लेकिन आज इस पोस्ट में हम बतायेंगे कि रथ यात्रा के  दिन हम सब क्या कर सकते हैं उस दिन आप क्या करें।

Jagannath Rath Yatra 2022: तो सर्वप्रथम कुछ करे ना करे केवल दो दीपदान अगर आप चाहो तो भगवान नारायण भगवान जगन्नाथ को समर्पित कर सकते हो दो दीपदान इसलिए क्योंकि एक सबसे बड़ी बात उस दिन गुरुवार शुक्रवार को यहाँ जो स्पेशल रूप से माँ लक्ष्मी जी ललिता देवी या माँ लक्ष्मी जी के ही स्वरूप का माना जाता है तो उसे दे । 

करें ऐस पूजा तो होगी लक्ष्मी प्रसन्न : 

rath yatra date 2022 : अगर आप गाय के घी का दीपक भगवान विष्णु स्वरूप की राइट हैंड साइड में यदि आपके घर में या मंदिर है तो उनके लिए  तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें अब जो आपने भगवान के दायें ओर और जो दीपक प्रज्वलित किया है उसमें आपको थोड़ा सा केसर डाल दीजिए और भगवान की बाईं और आपने जो तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित किया है उसमें आप एक लॉन्ग डाल दीजिए बस ये 2 दिन भगवान श्री कृष्णा को भगवान श्री राम को भगवान श्री जगन्नाथ जी को या भगवान विष्णु के किसी भी अवतार को या स्वयं भगवान विष्णु को ये दो दीपदान समर्पित कर सकते हैं ।

jagannath puri bhagwan : जगन्नाथ भगवान की पूजा अर्चना करने से लक्ष्मी की बहन जो है दरिद्रता जिसे हम कहते है वो सब दरिद्रता का विनाश हो जाता है । आापको बता दें कि जीवन में जो दुखद होती अंधकार है बहुत दूर होकर सुख दुख की शांति रूपी उजाले का प्रकाश का घर में आगमन होता है और लक्ष्मी नारायण भगवान गणेश जी रूप से निवास करते हैं दूसरी बात उस दिन अगर आप चाहो तो  भगवान श्रीविष्णु के सहस्रनाम का पाठ किसी भी समय कर सकते हो पर यह कब करना है आपको रथ यात्रा के दिन आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को। तो यह थी रथयात्रा के दिन की पूजा की एक विधि जिससे आपको धनलाभ होने की संभावना रहेगा। जय जगन्नाथ। 

  

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