Chhattisgarh

yuva mahotsav 2023 : विवेकानंद जी का रायपुर से आध्यात्मिक जुड़ाव

Yuva Diwas 2023: बचपन की आध्यात्मिक रूचि की झलक दिखी

Swami Vivekananda Birth Anniversary स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता आधुनिक नाम कोलकता में पिता विश्वनाथ दत्त और माता भुवनेश्वरी देवी के घर हुआ था।  जैसा कि आपको पता है स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day 2023 ) के रूप् में मनाया जाता है यहॉ इस लेख में आपको बताया जा रहा है विवेकानंद का रायपुर आगमन (raipur visit swami vivekanad ) और उनके रायपुर (raipur city )में बिताये गये समय के बारे में।

स्वामी विवेकानंद स्मारक डे-भवन (smarak de bhawan raipur )

रायबहादुर भूतनाथ डे चेरिटेबल ट्रस्ट बूढ़ापारा (Budha Talab) रायपुर का भवन (Swami Vivekanand Sarovar ) जहां वर्तमान में हरिनाथ अकादमी का स्कूल संचालित है। यहां राय बहादुर भूतनाथ डे चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से हरिनाथ एकेडमी इंग्लिश मीडियम हायर सेकंडरी स्कूल का संचालन किया जा रहा है।

पूरे 2 साल रायपुर में ठहरे स्वामी विवेकानंद (vivekand ji chhattisgarh )

दो साल जिस डे भवन (Swami Vivekanand Sarovar raipur ) में स्वामी विवेकानंद ने गुजारे थे, अब छत्तीसगढ़ सरकार ने उस भवन को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। शीघ्र ही वहां भव्य लाइब्रेरी और स्वामी जी की धरोहरों को संरक्षित रखने का कार्य शुरू होने जा रहा है।

yuva diwas 2023 – युवाओं के लिये पथप्रदर्शक

26th national youth festival – मुख्यमंत्री बघेल (cm baghel ) द्वारा 12 जनवरी को युवा दिवस के अवसर पर रायपुर स्थित गांधी मैदान में स्वामी विवेकानंद स्मारक डे-भवन का शुभारंभ किया गया।

छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ( baghel govrnment  ) ने रायपुर में स्वामी विवेकानंद के निवास स्थान (डे-भवन) को स्मारक के रूप में इसीलिये संरक्षण दिया था ताकि छत्तीसगढ़ में स्वामी विवेकानंद की निशानियों को संरक्षित कर इतिहास और भविष्य में युवा शक्ति की संकल्पना को मजबूती मिले।

कैसे मिला विवेकानंद नाम ?

(How Was Narendranath Datta Named Swami Vivekananda?)

स्वामी विवेकानंद (vivekananda jayanti in hindi )  की इच्छाशक्ति और उनकी स्मरण शक्ति का पूरे विश्व में परचम लहराया। ‘विवेकानंद नाम दिये जाने के पीछे की कहानी है कि राजस्थान के झुंझुनूं जिले के महाराजा अजीत सिंह ने ही केसरिया पगड़ी धारण करवाकर एक समय जब पूरे दुनिया में अशांति और अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म परिषद में हिन्दू धर्म व भारतीय संस्कृति का शंखनाद करने के लिए भेजा।जब स्वामी विवेकानंद अपने सिर पर स्वाभिमान की केसरिया पगड़ी पहने तो अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म परिषद में हिन्दू धर्म व भारतीय संस्कृति का शंखनाद कर वह भाषण सदैव के लिये अमर हो गया।

रायपुर में स्वामी विवेकानंद का आगमन कब हुआ?

(swami vivekanand raipur visiting places )

इतिहासकार डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र बताते हैं कि स्वामी विवेकानंद अपने पिता विश्वनाथ के साथ 1877 में यहां आए थे। स्वामी जी के पिता पेशे से वकील थे। वकालत के कार्य से रायपुर आए थे और अपने दोस्त राय बहादुर डे के यहां ठहरे हुए थे।
स्वामी विवेकानंद (swami vivekananda raipur ) ने अपने बचपन का सबसे ज्यादा समय छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ही बिताया। बचपन में वे रायपुर के मालवीय रोड ( raipur malviya road) से बूढ़ा तालाब (Budha Talab) के रास्ते के बीच जो डे भवन है वहीं ठहरे थे और अपनी पढ़ाई की।

विवेकानंद से जुड़ी वस्तुएं रायपुर में

स्वामी विवेकानंद ने जो उपयोगी वस्तुएं रायपुर में रखी थी वह आज भी सुरक्षित है इतिहासकारों के अनुसार।  विवेकानंद जी धार्मिक रूप से जुड़े होने के साथ ही आध्यात्मिक भी थे इसीलिये रायपुर के दूधाधारी मठ, जैतुसाव मठ और महामाया मंदिर में होने वाले धार्मिक आयोजनों का भी वह लाभ लेते थे और रायपुर से वे  प्रभावित हुए भी इसी आध्यात्म लगाव आध्यात्मिक रूचि का प्रभाव स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो भाषण में देखने  को मिला यह कहें तो गलत नहीं हैं क्योंकि बचपन में वह बालकाल के दौरान जो  रायपुर में हुआ था वह उनको आगे के जीवनकाल में धर्म की ज्ञान क्षमता को बढ़ाने में मददगार साबित हुआ।

विवेकानंद सरोवर में किये थे स्नान

बंगाली बोलने वाले स्वामी जी (swami vivekananda jayanti date 2023)जब रायपुर आए थे, तब महज 14 वर्ष की ही उम्र थी और हिन्दी नहीं आने से काफी दिक्कत होती थी परंतु रायपुर में उन्होंने हिन्दी सीखी थी।  रायपुर आगमन (raipur chhattisgarh )के समय मेट्रोपोलिटन विद्यालय की तीसरी कक्षा (आज की कक्षा आठ के समकक्ष) में पढ़ रहे थे।

चंद कदमों की दूरी पर भव्य बूढ़ा तालाब (vivekananda jayanti in hindi )  में वे सुबह स्नान करने जाते थे। रायपुर के इस सरोवर के बीचोंबीच स्वामी विवेकानंद की ध्यानमग्न अवस्था में सबसे ऊंची (बैठी अवस्था में) 37 Feet की प्रतिमा इसी कारण से लगाई गई है।   शिकागो की धर्म संसद में दिये गये भाषण में जो प्रभावशीलता दिखी थी कहीं न कहीं वह स्वामी जी के बचपन में रायपुर से जुड़े अध्यात्मक की भावना का भी दर्पण था।
आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो जुड़े रहिये जनता पोस्ट से।

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