Sarkari Yojana, CG Govt Scheme & Latest News – JantaPost

ispat protsahan yojana : आत्मनिर्भरता और नवाचार की नई उड़ान

भारत सरकार ने देश के इस्पात उद्योग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने “ispat protsahan yojana” के तीसरे चरण — पीएलआई 1.2 (Production Linked Incentive 1.2) — का शुभारंभ किया है। इस नई पहल का उद्देश्य भारत को उन्नत इस्पात निर्माण में वैश्विक अग्रणी बनाना है।

केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने नई योजना की घोषणा करते हुए कहा कि यह “आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक उज्जवल स्तंभ” है, जो देश को औद्योगिक आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।

पीएलआई 1.2 चरण से न केवल निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत में उच्च-गुणवत्ता वाले इस्पात उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे भारत का योगदान वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) में और मजबूत होगा, जो “विकसित भारत 2047” के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस्पात प्रोत्साहन योजना क्या है?

इस्पात प्रोत्साहन योजना” (PLI for Specialty Steel) को पहली बार जुलाई 2021 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में विशिष्ट और उच्च-गुणवत्ता वाले इस्पात उत्पादों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।

इन इस्पात उत्पादों का इस्तेमाल रक्षा, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। शुरुआत में इस योजना के लिए 6,322 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था, ताकि भारत विदेशी आयात पर निर्भरता घटाकर खुद का इस्पात उत्पादन केंद्र बन सके।

पिछले दो चरणों के तहत 43,874 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश सामने आया और 30,760 से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां सृजित की गईं। अब, तीसरे चरण पीएलआई 1.2 से निवेश और रोजगार के और बड़े अवसर बनेंगे।

ispat protsahan yojana पीएलआई 1.2 चरण में क्या है खास?

नया चरण यानी पीएलआई 1.2 भारत में सुपर अलॉय, सीआरजीओ स्टील, स्टेनलेस स्टील लांग और फ्लैट प्रोडक्ट्स, टाइटेनियम मिश्र धातु और कोटेड स्टील्स जैसी उन्नत श्रेणियों के उत्पादन पर केंद्रित है। ये वे सामग्रियां हैं जो भविष्य की औद्योगिक और रक्षा ज़रूरतों के लिए बेहद अहम हैं।

मंत्री कुमारस्वामी के अनुसार, यह चरण खासतौर पर एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) और उन कंपनियों के लिए नए अवसर खोलेगा जो पहले दो चरणों में शामिल होकर अपनी क्षमताओं का विस्तार कर चुकी हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि भारत अगले कुछ वर्षों में उच्च-ग्रेड इस्पात निर्माण का वैश्विक केंद्र बने, जो न केवल घरेलू मांग पूरी करे बल्कि अन्य देशों को भी निर्यात करे।

ispat protsahan yojana निवेश, रोजगार और विकास की नई दिशा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक पहले दो चरणों में भाग लेने वाली कंपनियों ने पहले ही 22,973 करोड़ रुपये का निवेश कर दिया है और 13,284 नौकरियां सृजित हो चुकी हैं।

ispat protsahan yojana पीएलआई 1.2 के तहत निवेशकों के लिए और आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं ताकि वे नए प्रोजेक्ट्स शुरू कर सकें। इससे भारत का इस्पात उद्योग न केवल तकनीकी रूप से सक्षम बनेगा बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और स्थायी उत्पादन पर भी ध्यान देगा।

मंत्री कुमारस्वामी ने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ भारत के लिए इस्पात बनाना नहीं है, बल्कि भारत से दुनिया को इस्पात आपूर्ति करना है।”

ispat protsahan yojana वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में कदम

“इस्पात प्रोत्साहन योजना” का सीधा संबंध आत्मनिर्भर भारत मिशन से है। इस योजना से देश में तकनीकी नवाचार, घरेलू उत्पादन क्षमता, और निर्यात-आधारित विकास तीनों को बल मिलेगा।

ispat protsahan yojana – भारत पहले ही दुनिया के शीर्ष इस्पात उत्पादक देशों में शामिल है। अब इस योजना के माध्यम से देश का फोकस उच्च मूल्य वाले इस्पात उत्पादों के उत्पादन पर होगा। इसका मकसद है कि भारत सिर्फ कच्चा माल नहीं, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाला तैयार इस्पात उत्पाद दुनिया को निर्यात करे।

इस्पात प्रोत्साहन योजना से कौन-कौन लाभान्वित होगा?

ispat protsahan yojana का फायदा सिर्फ बड़ी कंपनियों को ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को भी मिलेगा। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इस बार पीएलआई 1.2 में ऐसे उद्योगों को भी शामिल किया जाए जो नई तकनीक या मशीनरी के साथ अपनी क्षमता बढ़ाना चाहते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा और स्थानीय इस्पात क्लस्टर मजबूत होंगे।

पर्यावरण और स्थायी विकास की दिशा में प्रयास

इस्पात उद्योग अक्सर उच्च ऊर्जा खपत और कार्बन उत्सर्जन के लिए जाना जाता है, लेकिन “इस्पात प्रोत्साहन योजना” का नया चरण स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।

इसका लक्ष्य है कि भारत नेट ज़ीरो 2070 के लक्ष्य की दिशा में बढ़े और इस्पात उद्योग पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार बने।

सरकार चाहती है कि नई तकनीकों और ग्रीन स्टील उत्पादन के माध्यम से भारत न केवल उत्पादकता बढ़ाए, बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: इस्पात प्रोत्साहन योजना क्या है?
उत्तर: यह एक उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme) है, जिसका उद्देश्य भारत में विशेष श्रेणी के इस्पात का घरेलू उत्पादन बढ़ाना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

प्रश्न: ispat protsahan yojana योजना से कितनी नौकरियां बनी हैं?
उत्तर: अब तक इसके पहले दो चरणों से लगभग 31,000 प्रत्यक्ष नौकरियां सृजित हो चुकी हैं, जबकि तीसरे चरण से और हजारों रोजगार के अवसर बनेंगे।

प्रश्न: पीएलआई 1.2 में किन इस्पात उत्पादों पर ध्यान दिया जा रहा है?
उत्तर: इसमें सुपर अलॉय, स्टेनलेस स्टील, कोटेड स्टील्स, सीआरजीओ स्टील और टाइटेनियम मिश्र धातु जैसी उच्च गुणवत्ता वाली इस्पात श्रेणियां शामिल हैं।

प्रश्न: इस योजना से MSME को क्या फायदा मिलेगा?
उत्तर: तीसरा चरण छोटे उद्योगों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा, जिससे वे भी बड़े उद्योगों के साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।

ispat protsahan yojana : निष्कर्ष

इस्पात प्रोत्साहन योजना (PLI 1.2)” न सिर्फ भारत के औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत और “विकसित भारत 2047” के सपने को साकार करने का मार्ग भी प्रशस्त करती है। निरंतर निवेश, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक सहयोग के साथ, भारत आने वाले वर्षों में उन्नत इस्पात उत्पादों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन सकता है। इस पहल के साथ भारत का इस्पात क्षेत्र अब विकास, नवाचार और प्रतिस्पर्धा के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है — यह सिर्फ इस्पात की कहानी नहीं, बल्कि भारत की प्रगति की कहानी है।

read also – Atal Pension Yojna Kya Hai : बुढ़ापे में पेंशन, करें अप्लाई

Leave a Comment