
बस्तर (bastar chhattisgarh) के विशाल पाकृतिक संपदाओं को सहेजना और छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल के रूप में उभारने का प्रयास किया जा रहा है जिसके लिये अनेकों कदम उठाए गए हैं। माओवाद प्रभावित क्षेत्र बस्तर अब नक्सलमुक्त हुआ है तो जरूरत है विकसित बस्तर बनाने की जिसकी कवायद छत्तीसगढ़ सरकार ने की है। एक – एक क्षेत्र में बस्तर के खुशहाली का अनुभव हो इसके लिये शिक्षा से लेकर खेती, इंफ्रास्टकचर बुनियादी विकास पर खर्च किया जाएगा और किया भी जा रहा है जिसका असर दिखाई दे रहा है।
बस्तर के लघु वनोपजों के उपयोग को लेकर विष्णुदेव साय सरकार ने कहा है कि वह इसके लिये प्रतिबद्ध है। बस्तर, जो चार दशकों तक नक्सलवाद की वजह से विकास की मुख्यधारा से कटा रहा, अब एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर (bastar chhattisgarh )को देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियाँ बदल रही हैं और एक नए, समृद्ध बस्तर के निर्माण का अवसर प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे आमजन को मूलभूत सुविधाएँ सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।
bastar chhattisgarh नक्सलवाद से मुक्ति: एक ऐतिहासिक उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिनमें नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली सफलता भी शामिल है। उन्होंने बताया कि नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया गया। मजबूत नेतृत्व ने समाज में विश्वास और उत्साह का संचार किया, सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा और आम जनता खुलकर माओवाद के विरोध में सामने आई। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त करने का संकल्प दोहराया था।
‘बस्तर 2.0’ : विकास का नया खाका
राज्य सरकार ने बस्तर क्षेत्र को निवेश, बुनियादी ढाँचे और रोजगार सृजन का केंद्र बनाने के लिए “बस्तर 2.0” विकास खाका तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बस्तर 2.0 का विजन प्रस्तुत किया, जिसमें पर्यटन, स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र, बुनियादी ढाँचे के विस्तार और नवाचार-आधारित विकास पर विशेष जोर दिया गया। इस योजना का मूल उद्देश्य दूरस्थ और पहले से अलग-थलग गाँवों को एक मजबूत सड़क नेटवर्क के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ना है। बस्तर 2.0 के तहत 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण की योजना है, साथ ही 61 नई परियोजनाओं के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लंबित कार्यों को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
bastar chhattisgarh शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव
शिक्षा के क्षेत्र में बस्तर में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के 2026-27 के बजट में बस्तर के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। 1.72 लाख करोड़ रुपये के इस बजट में अबूझमाड़ और जगरगुंडा में दो “एजुकेशन सिटी” स्थापित करने की घोषणा की गई है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये दोनों क्षेत्र चार दशकों तक माओवाद के गढ़ रहे थे, लेकिन अब यहाँ आधुनिक शिक्षा नगर बसेंगे। प्रस्तावित एजुकेशन सिटी में प्राथमिक विद्यालय से लेकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों, खेल सुविधाओं और सड़कों की एकीकृत प्रणाली होगी। दूरस्थ गाँवों के बच्चों के लिए सुरक्षित और सहायक वातावरण में अध्ययन हेतु प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रावासों का निर्माण किया जाएगा। इन एजुकेशन सिटी में आईटी और कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल होंगे, जो स्थानीय युवाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए बस्तर में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। बंद पड़े 421 स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है। इसके अलावा कुंकुरी, मनेन्द्रगढ़ और दंतेवाड़ा में नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए 50 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
bastar chhattisgarh : स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
बस्तर संभाग के प्रतिष्ठित चिकित्सा केंद्र जिला चिकित्सालय महारानी अस्पताल जगदलपुर में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए 7 करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव के तहत अस्पताल की अधोसंरचना और सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कई जनहितैषी निर्णय लिए गए हैं। पुरानी हाई-टेंशन एवं लो-टेंशन विद्युत लाइनों को हटाकर आधुनिक एबी केबल लगाई जाएगी, जिससे शॉर्ट सर्किट और करंट लीकेज की समस्या से निजात मिलेगी।
सीटी स्कैन मशीन के पुराने बैटरी बैकअप को अपग्रेड करते हुए 100 एएच की 32 नई बैटरियाँ लगाई जाएंगी। अस्पताल की 200 बिस्तरों की क्षमता को बढ़ाकर 300 बिस्तरों तक विस्तारित करने, डायलिसिस सेंटर, कैंसर यूनिट और अटल आरोग्य लैब में सभी 134 प्रकार की जांच सुविधाएँ उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक लाखों लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल बनाई जा रही है।
bastar chhattisgarh : फौती नामांतरण अभियान: सुशासन की मिसाल
बस्तर जिले में पिछले चार वर्षों के लंबित फौती नामांतरण मामलों को निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य था कि जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनकी जमीन के रिकॉर्ड में उनके परिवार के सही वारिसों का नाम दर्ज किया जाए।
अभियान के दौरान बस्तर जिले के 611 गाँवों से जानकारी जुटाई गई। पिछले चार वर्षों में 17,405 लोगों की मृत्यु दर्ज हुई थी, जिनमें से 8,651 ऐसे मामले मिले जिनमें फौती नामांतरण की आवश्यकता थी। ग्राम सचिव, पटवारी और कोटवार की संयुक्त टीम ने घर-घर जाकर उन परिवारों के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए, जिनके पास नहीं थे। वारिसों की जानकारी और वंशवृक्ष तैयार किए गए। इस विशेष अभियान के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे — अब तक 8,241 मामलों में फौती नामांतरण पूरा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।
bastar chhattisgarh : आर्थिक विकास और आय वृद्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। नियद नेल्ला नार योजना और बस्तर मुन्ने अभियान के जरिए शासकीय योजनाओं का लाभ सैचुरेशन मोड में लोगों तक पहुँचाया जा रहा है। नियद नेल्लार 2.0 के तहत ग्रामीणों को 31 व्यक्तिगत लाभार्थी योजनाओं, 14 सामुदायिक-स्तरीय सुविधाओं और 10 आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में बस्तर की लगभग 85 प्रतिशत आबादी की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है।
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन के माध्यम से अगले तीन वर्षों में इस आय को दोगुना कर 30,000 रुपये प्रति माह करने का लक्ष्य रखा गया है। जनजातीय परिवारों को गाय अथवा भैंस उपलब्ध कराकर कृषि के साथ पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। बस्तर में “डेयरी मॉडल” को तेजी से लागू किया जा रहा है, जिसके तहत गाँवों में आय का सतत स्रोत बनाने हेतु जनजातीय परिवारों को दूध देने वाली गायें और भैंसें उपलब्ध कराने की योजना है। इस पहल से महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ डेयरी केंद्रों, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार विकास जैसी नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
bastar chhattisgarh : कृषि और सिंचाई में क्रांति
सिंचाई के क्षेत्र में बस्तर में बड़े बदलाव हो रहे हैं। इंद्रावती नदी पर देउरगाँव और मटनार बैराज के निर्माण के लिए 2,024 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है। इस पहल से बस्तर क्षेत्र में अतिरिक्त 32,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधाएँ मिलेंगी, जिससे कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और किसानों की आजीविका को मजबूती मिलेगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में वर्षभर पानी की उपलब्धता से कृषि में सुधार होगा और उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसान धान के साथ-साथ सब्जियाँ, फल और अन्य नकदी फसलें उगा सकेंगे।
सुरक्षा कैंप से सेवा डेरे तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहाँ पहले सुरक्षा कैंप स्थापित थे, वहाँ अब सेवा डेरे विकसित किए जा रहे हैं। बस्तर में स्थापित लगभग 200 सुरक्षा कैंपों को अब “सेवा डेरा” (सेवा केंद्र) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को शासकीय सेवाएँ, कौशल विकास और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जाएँगे। नियद नेल्लानर योजना के तहत सुरक्षा कैंपों के निकट 525 गाँवों तक 17 विभागों की 43 योजनाओं का लाभ पहुँचाया जा रहा है।
bastar chhattisgarh फाइटर्स: स्थानीय युवाओं को रोजगार
सरकार ने बस्तर फाइटर्स, एक विशेष पुलिस इकाई, में 1,500 नए पदों के सृजन की घोषणा की है। इससे न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बताया कि बस्तर फाइटर्स भर्ती 2026 का उद्देश्य युवाओं को उन्हीं के क्षेत्र में सम्मानजनक अवसर देना है, ताकि सुरक्षा बलों में स्थानीय भागीदारी बढ़े और विश्वास का रिश्ता मजबूत हो।
पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा
बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़ और कांगेर घाटी जैसे पर्यटन स्थलों में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों के माध्यम से यहाँ की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 7 फरवरी 2026 को जगदलपुर में बस्तर पंडुम 2026 का उद्घाटन किया।
इस तीन दिवसीय आदिवासी सांस्कृतिक महोत्सव ने इस क्षेत्र की समृद्ध विरासत का जश्न मनाया। राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर का डर का माहौल अब समाप्त हो रहा है। बस्तर ओलंपिक 2026 नवंबर-दिसंबर में आयोजित किया जाएगा, जो पूर्णतः नक्सल-मुक्त बस्तर में होगा। बस्तर में जल क्रीड़ा, साहसिक खेल और जंगल सफारी का विस्तार किया जा रहा है।
bastar chhattisgarh : बस्तर आम महोत्सव 2026
जगदलपुर स्थित शासकीय उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘बस्तर आम महोत्सव 2026’ में आम की 200 से अधिक किस्में प्रदर्शित की गईं। महोत्सव ने बस्तर के पारंपरिक एवं दुर्लभ आमों की विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया। कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने आम से तैयार मूल्य संवर्धित उत्पादों — अचार, अमचूर, पना, मैंगो पल्प — की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी
बस्तर 2.0 योजना के तहत कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। रावघाट-जगदलपुर रेलवे लाइन और जगदलपुर हवाई अड्डे के विस्तार की योजना है। सड़क, रेल और क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी में सुधार से उस अलगाव को कम करने में मदद मिलेगी जो दशकों से इस क्षेत्र की पहचान रहा है।
सेवा केंद्र और डिजिटल क्रांति
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर में ‘जन जन सुविधा केंद्र’ का उद्घाटन किया। इन केंद्रों के माध्यम से सस्ती राशन की दुकानें, प्राथमिक विद्यालय, पेयजल सुविधाएँ, आधार नामांकन, राशन कार्ड और प्रधानमंत्री मोदी की स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 5 लाख रुपये तक के उपचार की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। बस्तर में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएँ गाँवों तक पहुँच रही हैं।
विधानसभा अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री के विचार
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक वर्षों की मेहनत और गहन अध्ययन का परिणाम है। यह पुस्तक बस्तर के दूरस्थ जंगलों तक पहुँचकर, आत्मसमर्पित नक्सलियों से संवाद कर और जमीनी वास्तविकताओं को समझकर तैयार की गई है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवाद किसी आर्थिक आवश्यकता से नहीं, बल्कि एक विचारधारा के रूप में आया था। उन्होंने कहा कि आज वे बंदूकें वापस रखवाई जा चुकी हैं और समाज सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। नक्सलवाद के समाप्त होने के बाद बस्तर में मेलों, मड़इयों और साप्ताहिक बाजारों में फिर से रौनक लौट आई है।
FAQ
प्रश्न 1: bastar chhattisgarh में नक्सलवाद की समाप्ति के बाद क्या बदलाव आए हैं?
नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर में विकास की गति तेज हो गई है। सुरक्षा कैंपों की जगह अब सेवा डेरे बन रहे हैं। बंद पड़े 421 स्कूल फिर से खोले गए हैं। देवगुड़ियों में पूजा-पाठ शुरू हो गया है। मेलों, मड़इयों और साप्ताहिक बाजारों में पहले जैसी रौनक लौट आई है। सरकार ने बस्तर को विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए ‘बस्तर 2.0’ योजना शुरू की है।
प्रश्न 2: बस्तर में शिक्षा के क्षेत्र में क्या सुधार किए जा रहे हैं?
बस्तर में शिक्षा को मजबूत करने के लिए अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की लागत से दो एजुकेशन सिटी बनाई जा रही हैं। सुदूर गाँवों में ‘शाला प्रवेशोत्सव’ आयोजित कर बच्चों को स्कूल से जोड़ा जा रहा है। निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और लेखन सामग्री का वितरण किया जा रहा है। कुंकुरी, मनेन्द्रगढ़ और दंतेवाड़ा में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं।
प्रश्न 3: बस्तर में स्वास्थ्य सुविधाओं को कैसे बेहतर बनाया जा रहा है?
जगदलपुर के महारानी अस्पताल के उन्नयन के लिए 7 करोड़ रुपये से अधिक की योजना तैयार की गई है। पुरानी विद्युत लाइनों को आधुनिक एबी केबल से बदला जा रहा है। सीटी स्कैन और वेंटिलेटर जैसी मशीनों का अपग्रेडेशन किया जा रहा है। ‘स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत लाखों लोगों की स्वास्थ्य जांच हुई है। 36 लाख लोगों की डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल बनाई जा रही है।
प्रश्न 4: bastar chhattisgarh में आर्थिक विकास के लिए क्या योजनाएँ चलाई जा रही हैं?
‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के तहत अगले तीन वर्षों में परिवारों की आय को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह करने का लक्ष्य है। नियद नेल्ला नार योजना के तहत 31 व्यक्तिगत योजनाओं और 14 सामुदायिक सुविधाओं का लाभ गाँवों तक पहुँचाया जा रहा है। जनजातीय परिवारों को गाय और भैंस देकर डेयरी व्यवसाय से जोड़ा जा रहा है। ‘बस्तर फाइटर्स’ में 1,500 स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाएगा।
प्रश्न 5: बस्तर में पर्यटन और सड़क संपर्क को कैसे बढ़ावा दिया जा रहा है?
बस्तर 2.0 के तहत 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण की योजना है। चित्रकोट, तीरथगढ़ और कांगेर घाटी में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। रावघाट-जगदलपुर रेलवे लाइन और जगदलपुर हवाई अड्डे का विस्तार हो रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक के आयोजन से क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। इंद्रावती नदी पर देउरगाँव और मटनार बैराज के निर्माण से 32,000 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
निष्कर्ष:
बस्तर (bastar chhattisgarh ) आज विकास और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब पिछड़ेपन का प्रतीक नहीं, नए भारत की संभावनाओं का प्रवेश द्वार बन रहा है। यहाँ का हर गाँव, हर परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़े यही हमारा लक्ष्य है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी प्रयासों की सराहना करते हुए राज्य को केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बस्तर में विकास और विश्वास की बयार बह रही है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और मानवीय अभियानों से भटके हुए लोगों को उम्मीद मिली है। बस्तर अब केवल नक्शे पर नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक चेतना के केंद्र में खड़ा होने जा रहा है।




