cg breaking news

CG News: HNLU में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

CG News: छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HNLU), रायपुर तथा इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) के संयुक्त तत्वावधान में “कैंपेन फाइनेंस एंड एक्सपेंडिचर इन इलेक्शंस” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।

यह सम्मेलन चुनाव प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों, विधि विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जहाँ लोकतांत्रिक शासन के एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय — चुनावी वित्तपोषण के नियमन और चुनावी व्यय की निगरानी — पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को HNLU के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन, छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री भास्कर विलास संदीपन (आईएएस) तथा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री यशवंत कुमार (आईएएस) ने संबोधित किया। वहीं, IIIDEM की सहायक प्राध्यापक डॉ. कृतिका माथुर ने चुनावी प्रशासन को मजबूत बनाने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर विशेष प्रस्तुति दी।

read – हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में विभिन्न पदों पर भर्ती

इस अवसर पर HNLU के कुलपति प्रो. विवेकानंदन ने घोषणा की कि विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस द्वारा शीघ्र ही “डेमोक्रेटिक लीडरशिप अकादमी (DLA)” की शुरुआत की जाएगी, जिसमें इलेक्टोरल रिफॉर्म्स (चुनावी सुधार) एक प्रमुख फोकस क्षेत्र होगा।

राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता, जवाबदेही और समानता को लेकर विश्वभर में बढ़ती चिंताओं की पृष्ठभूमि में आयोजित इस सम्मेलन में चुनावी वित्तपोषण के नियमन, चुनावी खर्च की निगरानी, सार्वजनिक वित्तपोषण की व्यवस्थाओं, प्रकटीकरण तंत्र तथा डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न नई चुनौतियों पर चर्चा की गई।

cg news : पहला तकनीकी सत्र

“कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन: फाउंडेशन ऑफ अ क्लीन मनी फ्रेमवर्क” विषय पर आयोजित पहले सत्र का संचालन HNLU के सहायक प्राध्यापक डॉ. अनिंध्य तिवारी ने किया। इस सत्र में कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन तथा HNLU के स्कूल ऑफ लॉ एंड पब्लिक पॉलिसी के निदेशक प्रो. (डॉ.) योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने डिजिटल माध्यमों से होने वाले वित्तीय योगदान, प्रत्यक्ष वित्तपोषण के मॉडल और जवाबदेही की व्यवस्थाओं जैसे मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

दूसरा तकनीकी सत्र

“एक्सपेंडिचर रेगुलेशन: कंट्रोलिंग द कॉस्ट ऑफ डेमोक्रेसी” विषय पर आयोजित सत्र का संचालन डॉ. मयंक श्रीवास्तव ने किया। इस सत्र में स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस के निदेशक डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव तथा सामाजिक विज्ञान एवं छात्र कल्याण संकाय के अधिष्ठाता डॉ. अविनाश सामल ने चुनावी खर्च की निगरानी और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कानूनी एवं संस्थागत व्यवस्थाओं पर प्रकाश डाला।

तीसरा तकनीकी सत्र

“पब्लिक एंड स्टेट फंडिंग: इक्विटेबल आर्किटेक्चर्स फॉर पॉलिटिकल फाइनेंसिंग” विषय पर आयोजित सत्र का संचालन डॉ. एरिट्रिया रॉय ने किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग के प्रो. डॉ. राकेश डेरहगावेन तथा ए.के.पी. (अभिनव करडेकर एंड पार्टनर्स) के अधिवक्ता श्री प्रणव खंडेलवाल ने सार्वजनिक वित्तपोषण के विभिन्न मॉडलों तथा चुनावी प्रतिस्पर्धा को अधिक निष्पक्ष और समावेशी बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की।

चौथा तकनीकी सत्र

“इमर्जिंग एंड क्रॉस-कटिंग इश्यूज़: डिजिटल फ्रंटियर्स, ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड एआई इन कैंपेन फाइनेंस” विषय पर आयोजित सत्र का संचालन डॉ. अमितेश देशमुख ने किया।

सत्र में डॉ. अनिंध्य तिवारी तथा एसआरएम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एवं डीन प्रो. (डॉ.) विजय कुमार सिंह ने डिजिटल राजनीतिक विज्ञापन, अवैध वित्तीय स्रोतों, एल्गोरिद्मिक प्रभाव तथा चुनावी प्रक्रियाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण प्रस्तुत किया।

पाँचवाँ और अंतिम तकनीकी सत्र

“डिस्क्लोजर, ट्रांसपेरेंसी एंड ओवरसाइट: मेकिंग कैंपेन फाइनेंस लेजिबल” विषय पर आयोजित अंतिम सत्र का संचालन डॉ. देबमिता मंडल ने किया।

इस सत्र में दक्षिण अफ्रीका की निर्वाचन प्रबंधन संस्था के प्रतिनिधि ने भाग लिया और चुनावी वित्तपोषण में पारदर्शिता, प्रकटीकरण व्यवस्था और सार्वजनिक जवाबदेही से संबंधित वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया।

समापन सत्र

cg hnlu सम्मेलन का समापन श्री हार्दिक श्रीवास्तव और डॉ. अमितेश देशमुख द्वारा संचालित विचार-विमर्श के साथ हुआ। वक्ताओं ने पूरे दिन की चर्चाओं से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों को रेखांकित करते हुए लोकतांत्रिक जवाबदेही को और सुदृढ़ बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया। यह सम्मेलन चुनावी वित्तपोषण और व्यय प्रबंधन से जुड़े जटिल प्रश्नों पर सार्थक संवाद का मंच बना तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button