रायपुर, Janta Post । आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग) विजय  कुमार झा, प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ़ और रायपुर लोकसभा अध्यक्ष अजीम खान द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप नेताओं ने कहा कि राजधानी रायपुर में उत्पन्न भीषण पेयजल संकट ने आम नागरिकों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

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Raipur के अनेक क्षेत्रों—चंगोराभाटा, रायपुरा, मोवा, पंडरी, सक्ति नगर, दलदल सिवनी,सुंदर नगर सहित कई इलाकों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर हैं। राजधानी रायपुर में अनेक इलाकों में लगातार जल स्तर गिर रहा है, रायपुर के ज़ोन 1 में  ठक्कर बाबा वार्ड में रोजाना पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। ज़ोन 3 के खम्हारडीह का पूरा इलाका जो जहां लगभग 30000 लोग रहतें हैं वहां 90 फ़ीसदी लोग पेयजल संकट से गुजर रहें हैं।

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ज़ोन 5 के वार्ड 3,वार्ड 67, वार्ड 68 और वार्ड 69 में पानी के हालात गंभीर बने हुए हैं। ज़ोन 6 के प्रोफेसर कॉलोनी,शिवाजी नगर, परशुराम नगर, मारुति नगर में आधा हिस्सा पानी से प्रभावित है। ज़ोन 9 में दुबे कॉलोनी, दलदल सिवनी, जोरा लाभांडी, कचना, सड्डू सहित इलाके में भूजल संकट बना हुआ है। कचना के जीडीए कॉलोनी में जहां 2009 सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों का परिवार है, लगातार 15 दिनों से पानी की दिक्कत बनी हुई है।

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वहीं ज़ोन 4 में रवि शंकर शुक्ला वार्ड, ब्राह्मण पारा,यादव पारा में नलों में पिछले 10 दिनों से लो प्रेशर की समस्या बनी हुई है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि टैंकर पहुंचते ही लोगों की भीड़ उस पर टूट पड़ती है, मानो पानी नहीं बल्कि जीवन बांटा जा रहा हो।

आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी जनता को पानी तक न दे पाना सरकार की सबसे बड़ी विफलता —आम आदमी पार्टी

यदि राजधानी रायपुर में ही सरकार जनता को पीने का पानी उपलब्ध नहीं करवा पा रही है, तो राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों की स्थिति कितनी भयावह और नारकीय होगी, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है।

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यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हर साल गर्मियों में पीने के पानी का संकट और हर बरसात में जलभराव की समस्या सामने आती है, लेकिन सरकार इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के बजाय उन्हें छुपाने और समय बिताने की नीति अपनाती रही है। यही इनका तथाकथित “विकास मॉडल” है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि जिन क्षेत्रों में पानी पहुंच भी रहा है, वहां मटमैला और अस्वच्छ पानी लोगों को पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।

फिर भी स्थायी समाधान नहीं — आखिर क्यों?

यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हर वर्ष गर्मियों में राजधानी रायपुर में जल संकट उत्पन्न होता है, लेकिन नगर निगम और राज्य सरकार आज तक कोई दीर्घकालिक और ठोस योजना बनाने में विफल साबित हुई हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि:

जब समस्या हर साल सामने आती है, तो स्थायी समाधान की योजना क्यों नहीं बनाई जाती? क्या प्रशासन केवल खानापूर्ति कर समय बिताने में लगा हुआ है?

वर्षों से चली आ रही सरकारों की विफलता: 

राज्य में वर्षों से कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस की सरकारें सत्ता में आती रही हैं, लेकिन आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी सबसे अनिवार्य मूलभूत सुविधा—पानी—तक आम जनता को उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। इससे साफ़ जाहिर होता है कि ये दोनों दल जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय स्वार्थ और सत्ता की राजनीति में उलझे रहे हैं। आज जनता जो पीड़ा झेल रही है, वह वर्षों की लापरवाही, भ्रष्टाचार और दूरदर्शिता की कमी का परिणाम है। आम आदमी पार्टी इस गंभीर जनसमस्या को लेकर जिसमें इस जल संकट को पूरे प्रदेश के सामने मजबूती से उठाया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की करती है ।

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आम आदमी पार्टी का रायपुर निगम प्रशासन से सवाल :

क्यों जनता को गंदा और अस्वच्छ पानी पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है?

नगर निगम और सरकार की जवाबदेही कब तय होगी?

हर वर्ष होने वाले जल संकट के बावजूद स्थायी समाधान की योजना क्यों नहीं बनाई गई?

आम आदमी पार्टी की स्पष्ट चेतावनी है कि यदि शीघ्र ही इस जल संकट का स्थायी और ठोस समाधान नहीं किया गया, तो आम आदमी पार्टी प्रभावित जनता के साथ मिलकर रायपुर नगर निगम का जोरदार घेराव करेगी। यह आंदोलन केवल चेतावनी नहीं, बल्कि जनता के हक और अधिकारों की निर्णायक लड़ाई की शुरुआत होगी।