
छत्तीसगढ़ के इतिहास ( Chhattisgarh News ) में 22 जून 2026 का दिन एक खास दिन बन गया। रायपुर रेलवे स्टेशन पर हज़ारों लोगों की भीड़ थी, शंख की आवाज़ें थीं, और एक अलग ही उत्साह था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के लिए विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाई और सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा का शुभारंभ हुआ। यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं थी — यह छत्तीसगढ़ की आस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव का एक जीवंत उत्सव था। वैसे अयोध्या के राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम में भी भक्तों मुख्यमंत्री के द्वारा यह योजना संचालित होती है उसमें जाने का अवसर प्रदान किया जाता है।
छत्तीसगढ़ से सोमनाथ के लिए निकली ऐतिहासिक यात्रा
सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा छत्तीसगढ़ सरकार की एक विशेष पहल है। इस यात्रा के तहत राज्य के कोने-कोने से चुने हुए विशिष्टजन, पद्मश्री सम्मानित हस्तियाँ, कलाकार और साहित्यकार एक साथ सोमनाथ धाम की ओर रवाना हुए। यह कोई साधारण तीर्थ यात्रा नहीं थी। इसमें वे लोग शामिल थे जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है।
छत्तीसगढ़ और गुजरात — दोनों राज्यों की संस्कृति और आस्था इस यात्रा में एक धागे में पिरोई गई। छत्तीसगढ़ में भगवान शिव की उपासना की गहरी परंपरा है। यहाँ के शिवालय, नदियाँ और जनजातीय संस्कृति — सब कुछ शिव से जुड़ा है। इसीलिए इस यात्रा का महत्व केवल धार्मिक नहीं, सांस्कृतिक भी है।
CM साय ने किया शुभारंभ: 1000 से अधिक श्रद्धालु रवाना
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर रेलवे स्टेशन पर विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान, सांस्कृतिक गौरव और आस्था का प्रमुख केंद्र है। उनके शब्दों में एक गहरी भावना थी जो वहाँ मौजूद हर इंसान ने महसूस की।
इस विशेष ट्रेन में 1000 से अधिक यात्री सवार हुए। इनमें पद्मश्री सम्मानित कलाकार, राज्य और राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त साहित्यकार और विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्टजन शामिल थे। मुख्यमंत्री साय ने यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। उन्होंने सभी को अंगवस्त्र भेंट किया और मंगलमय यात्रा की कामना की। यह छोटा सा gesture बहुत कुछ कह गया — एक मुख्यमंत्री का अपने लोगों के प्रति सम्मान और आत्मीयता।
माटी कलश और जल कलश: छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक
इस यात्रा की सबसे खास और अनूठी बात थी — माटी कलश और जल कलश। यात्रा में शामिल श्रद्धालु अपने साथ छत्तीसगढ़ के शिवालयों की पावन भूमि की माटी और राज्य की पावन नदियों का जल लेकर चले। यह माटी और जल भगवान सोमनाथ को अर्पित किया जाएगा।
यह परंपरा बहुत गहरी है। जब आप किसी तीर्थ पर जाते हैं और अपनी धरती की माटी साथ लेकर जाते हैं, तो यह सिर्फ एक अनुष्ठान नहीं होता। यह आपकी जड़ों से जुड़ाव होता है। छत्तीसगढ़ की नदियाँ जैसे महानदी, शिवनाथ और इंद्रावती — ये सिर्फ जल की धाराएँ नहीं हैं। ये इस राज्य की सभ्यता और संस्कृति की वाहक हैं। उनका जल जब सोमनाथ को अर्पित होगा, तो यह पूरे छत्तीसगढ़ की श्रद्धा का प्रतीक बनेगा।
Chhattisgarh News : सोमनाथ मंदिर का इतिहास:
सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला और सबसे प्राचीन ज्योतिर्लिंग है। यह गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में प्रभास पाटन में स्थित है। इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है। यह मंदिर सदियों से भारतीय आस्था का केंद्र रहा है।
इतिहास में सोमनाथ मंदिर पर कई बार आक्रमण हुए। महमूद गज़नवी ने 1025 ई. में इस मंदिर को लूटा और तोड़ा। लेकिन हर बार मंदिर टूटा और हर बार बना। यही इस मंदिर की और भारतीय आस्था की सबसे बड़ी ताकत है। मुख्यमंत्री साय ने भी इसी बात को रेखांकित किया — सोमनाथ मंदिर को अनेक बार आक्रांताओं ने तोड़ा, लेकिन हर बार मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ।
आज़ादी के बाद लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। यह उनके लिए राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक था। 1951 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर का लोकार्पण किया। वह क्षण भारत के इतिहास का एक गौरवशाली पल था।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026–27: PM मोदी की राष्ट्रीय पहल
सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा एक बड़ी राष्ट्रीय पहल का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में 11 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2027 तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व राष्ट्रीय स्मरणोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। यह पूरे एक साल का उत्सव है।
इस पर्व का उद्देश्य सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ को राष्ट्रीय स्तर पर मनाना है। देशभर के विभिन्न राज्यों से सांस्कृतिक यात्राएँ आयोजित की जा रही हैं। छत्तीसगढ़ की यह यात्रा उसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह पहल भारत की विविधता में एकता को एक नया आयाम दे रही है। अलग-अलग राज्यों की माटी और नदियों का जल जब एक ही तीर्थ पर अर्पित होता है, तो यह सिर्फ धार्मिक कृत्य नहीं रहता — यह राष्ट्रीय एकता का एक जीवंत संदेश बन जाता है।
संस्कृति मंत्री और अन्य गणमान्य लोगों की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि सोमनाथ धाम की यह यात्रा श्रद्धालुओं को केवल आध्यात्मिक अनुभूति ही नहीं, बल्कि भारत की महान सांस्कृतिक परंपरा और राष्ट्रीय गौरव को निकट से अनुभव करने का अवसर भी देगी।
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कार्यक्रम में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक धरमलाल कौशिक, अनुज शर्मा, इंद्रकुमार साहू, डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, संपत अग्रवाल, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा और जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। इतने बड़े स्तर पर प्रशासनिक और राजनीतिक उपस्थिति ने इस यात्रा के महत्व को और भी रेखांकित किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल ( FAQ)
सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा क्या है?
यह छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित एक विशेष सांस्कृतिक यात्रा है जिसमें राज्य के विशिष्टजन, पद्मश्री, कलाकार और साहित्यकार गुजरात स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए रवाना हुए।
इस यात्रा में कितने लोग शामिल हुए?
इस विशेष ट्रेन यात्रा में छत्तीसगढ़ से 1000 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए।
माटी कलश और जल कलश क्यों ले जाया गया?
यात्री छत्तीसगढ़ के शिवालयों की पावन माटी और राज्य की पवित्र नदियों का जल भगवान सोमनाथ को अर्पित करने के लिए अपने साथ लेकर गए। यह छत्तीसगढ़ की आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व कब से कब तक मनाया जा रहा है?
PM नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह राष्ट्रीय स्मरणोत्सव 11 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2027 तक पूरे देश में मनाया जा रहा है।
सोमनाथ मंदिर कहाँ स्थित है?
सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में प्रभास पाटन में स्थित है। यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला और सबसे प्राचीन ज्योतिर्लिंग है।
निष्कर्ष: सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण
सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा सिर्फ एक ट्रेन यात्रा नहीं थी। यह छत्तीसगढ़ की आत्मा का सोमनाथ से मिलन था। छत्तीसगढ़ की माटी, यहाँ की नदियों का जल, यहाँ के कलाकार और साहित्यकार सब कुछ एक साथ एक पवित्र उद्देश्य के लिए निकले। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह पहल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान दे रही है। सोमनाथ मंदिर बार-बार टूटा और बार-बार बना — यही भारत की असली ताकत है। और इस यात्रा ने उसी ताकत को एक बार फिर जीवंत कर दिया।




