Chhattisgarh news today : छत्तीसगढ़ लेटेस्ट न्यूज
जनता पोस्ट । आज की लेटेस्ट छत्तीसगढ़ ब्रेकिंग न्यूज Chhattisgarh news today जानिये गरीबों के हक पर डाल रहे डाका रायपुर सेंट्रल जेल में गूंजा सदाचार का मंत्र: गायत्री परिवार ने विचाराधीन बंदियों को पढ़ाया नैतिक शिक्षा का पाठ, नक्सली सरेंडर का वेरिफिकेशन, सीएसईबी स्कूलों में एनसीआरटीई किताबें जरूरी साय से जापान के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात ।
गरीबों के हक पर डाल रहे डाका
रायपुर से खबर है राजधानी रायपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत संचालित राशन दुकानों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ दुकानों पर हितग्राहियों को चावल देने के बजाय नकद लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह मामला न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि गरीबों के अधिकारों पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
शिकायत के अनुसार, कामरेड सुधीर मुखर्जी वार्ड स्थित दुकान (आईडी 441001281) और लालपुर, एमएमआई अस्पताल के पास स्थित दुकान (आईडी 441001283) में यह गड़बड़ी सामने आई है।
दोनों दुकानों का संचालन हेमदुर्गा साहू के नाम पर बताया जा रहा है। हितग्राहियों का आरोप है कि दोनों स्थानों पर समान तरीके से चावल के बदले नकद दिया जा रहा है।
कार्डधारकों के मुताबिक, दुकान संचालक खुलेआम कहता है कि चावल नहीं मिलेगा, पैसा लेना हो तो ले लो, नहीं तो कहीं और से ले लो। इससे स्पष्ट होता है कि नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और जरूरतमंदों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ राशन दुकानों के संचालकों ने आपसी तालमेल से चावल का एक तय ‘रेटÓ निर्धारित कर लिया है। बाजार में 30-35 रुपये प्रति किलो बिकने वाला चावल गरीबों से लगभग 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से नकद देकर वापस लिया जा रहा है।
कई जगहों पर तीन माह के राशन में से केवल दो माह का चावल दिया जा रहा है और तीसरे माह का पैसा थमा दिया जाता है।
हितग्राहियों का कहना है कि जब वे पूरा राशन मांगते हैं तो उन्हें परेशान किया जाता है या मना कर दिया जाता है। इस कारण लोगों में भारी नाराजगी है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
नागरिकों ने जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो गरीबों को मिलने वाला सस्ता अनाज पूरी तरह खत्म हो सकता है।
फूड कंट्रोलर भूपेंद्र मिश्रा ने बताया कि राशन दुकानों में अनाज के बदले नकद देने की शिकायतें गंभीर हैं और इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में राशन कार्ड धारकों को निर्धारित मात्रा में चावल देना अनिवार्य है, इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उनके अनुसार जांच में दोषी पाए जाने वाले संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Chhattisgarh news today – रायपुर सेंट्रल जेल में गूंजा सदाचार का मंत्र
रायपुर जनता पोस्ट । राजधानी स्थित केंद्रीय जेल के 18 से 21 वर्ष आयु वर्ग के विचाराधीन बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए जेल प्रशासन के सहयोग से गायत्री परिवार रायपुर द्वारा एक विशेष ‘नैतिक शिक्षा एवं व्यक्तित्व विकासÓ सत्र का आयोजन किया गया। 6 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अपराध का मार्ग त्यागकर नेक इंसान बनने के लिए प्रेरित करना था।
जेल महानिदेशक श्री हिंमाशु गुप्ता के मार्गदर्शन और जेल अधीक्षक श्री योगेश सिंह के विशेष सहयोग से इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। जेल प्रशासन का मानना है कि इस तरह के आध्यात्मिक और नैतिक कार्यक्रमों से बंदियों के व्यवहार में सकारात्मक सुधार ।
समता कॉलोनी स्थित गायत्री शक्तिपीठ के परिव्राजक भाई श्री नीलम सिंह सिन्हा ने प्रतिदिन बंदियों को अनुशासित जीवन और सदाचार की शिक्षा दी। उन्होंने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के दार्शनिक विचारों को साझा करते हुए कहा: मनुष्य मूल रूप से एक भटका हुआ देवता है। उसके भीतर ईश्वरीय क्षमता (देवत्व) मौजूद है, लेकिन वासना, तृष्णा और अहंकार के कारण वह अपनी असली पहचान भूल गया है।
इस दौरान बंदियों को ध्यान योग, व्यक्तित्व विकास, जीवन प्रबंधन एवं संस्कार निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया तथा नियमित ध्यान एवं योग सत्रों के माध्यम से उनके अंदर आत्म नियंत्रण, तनाव प्रबंधन एवं मानसिक शांति की भावना विकसित की गई।
सभी बंदियों ने बुराई को छोड़कर नेक रास्ते पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया। गायत्री परिवार के मीडिया प्रभारी प्रज्ञा प्रकाश निगम ने जानकारी दी कि स्थानीय प्रशासन के सहयोग से गायत्री परिवार द्वारा बंदियों के सुधार हेतु इस प्रकार के कार्यक्रम केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों की जेलों में भी निरंतर चलाए जा रहे हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की होगी जांच
रायपुर जनता पोस्ट – छत्तीसगढ़ में पिछले तीन वर्षों में नक्सलियों के आत्मसमर्पण में तेजी आई है। जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक 2,714 नक्सलियों ने सरेंडर किया छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता के बाद अब राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तव में सरेंडर करने वाले लोग सही हैं और उन्हें ही पुनर्वास योजनाओं का लाभ मिले।
राज्य सरकार के इस फैसले के तहत अब नक्सल प्रभावित जिलों के पुलिस अधीक्षक को विशेष अधिकार दिए गए हैं। वे आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पूरी जानकारी जुटाकर उसका रिकॉर्ड तैयार करेंगे और उसे अपडेट भी करेंगे।
मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है। हालांकि इससे पहले राज्यभर में करीब 2700 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। अब सरकार चाहती है कि इन सभी मामलों की सही तरीके से जांच हो, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
राज्य सरकार का यह फैसला केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप लिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा वर्ष 2013 और 2022 में जारी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी नक्सली जिला मजिस्ट्रेट, एसपी या अन्य अधिकृत अधिकारी के सामने आत्मसमर्पण कर सकता है। इसी नीति के तहत अब जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षकों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे समर्पण करने वाले नक्सलियों की जानकारी का सत्यापन करें और उसका पूरा रिकॉर्ड तैयार करें।
इस नई व्यवस्था के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पूर्ववृत्त की विस्तृत जांच की जाएगी। उनके पिछले गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार होगा। दिए गए विवरण को निर्धारित फॉर्मेट में भरा जाएगा। संबंधित एजेंसियों से जानकारी का मिलान किया जाएगा। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से आत्मसमर्पण का दावा कर सरकारी लाभ न ले सके।
सीएसईबी स्कूलों में एनसीआरटीई किताबें अनिवार्य
रायपुर, छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और किफायती बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्य सचिव ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि ष्टक्चस्श्व से मान्यता प्राप्त सभी निजी स्कूलों में अब केवल एनसीआरटीई की पाठ्य पुस्तकों से ही पढ़ाई कराना अनिवार्य होगा।
जारी आदेशों में स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी निजी स्कूल छात्रों या अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
सरकार का उद्देश्य अभिभावकों पर बढ़ते शैक्षणिक खर्च को कम करना और सभी के लिए शिक्षा को सुलभ बनाना है। इस निर्णय से अब अभिभावकों को महंगी किताबों के बोझ से राहत मिलेगी।
सीबीएसई और सीजी बोर्ड दोनों के लिए नियम लागू
निर्देशों के अनुसार सीबीएसई से जुड़े स्कूलों में केवल एनसीआरटीई का पाठ्यक्रम लागू रहेगा। सीजी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में एसआरटीई द्वारा प्रकाशित किताबें नि:शुल्क दी जाती रहेंगी। पहली से 8वीं तक शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत हृष्टश्वक्रञ्ज किताबें अनिवार्य होंगी।
स्कूल अब छात्रों को किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अभिभावकों को विकल्प मिलेगा।
जिला स्तर पर शिकायतों के निपटारे के लिए पारदर्शी सिस्टम बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
यह फैसला शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे न केवल शिक्षा का स्तर समान होगा बल्कि अभिभावकों को आर्थिक राहत भी मिलेगी। आने वाले समय में इस निर्णय का व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
मुख्यमंत्री से जापान के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।
मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक विकास और तकनीकी सहयोग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर अपने जापान प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार की उद्योगोन्मुखी और निवेश प्रोत्साहनकारी नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जापान तकनीकी दृष्टि से अग्रणी देश है और वहां की उन्नत विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के निवेश और सहयोग से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
निष्कर्ष (Conclusion):
Chhattisgarh news today में हमने जाना छत्तीसगढ़ में हाल की गतिविधियाँ प्रशासनिक सख्ती, सामाजिक सुधार और विकास की दिशा में एक साथ बढ़ते कदमों को दर्शाती हैं। जहां एक ओर गरीबों के अधिकारों पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर चिंता जताई जा रही है, वहीं रायपुर सेंट्रल जेल में नैतिक शिक्षा के माध्यम से बंदियों के सुधार की पहल सराहनीय है। नक्सली सरेंडर के सत्यापन और शिक्षा व्यवस्था में एनसीआरटीई किताबों को अनिवार्य करना शासन की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर फोकस दिखाता है। साथ ही, जापान के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

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