Raipur Live News : @jantapost रायपुर नगर निगम एवं सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (CEED) द्वारा अमिटी यूनिवर्सिटी, रायपुर के सहयोग से “संवेदनशील शहरी श्रमिकों मे हीट रेजिलिएंस विकसित करनाष् विषय पर एक राउंडटेबल चर्चा का आयोजन किया गया।  

कार्यक्रम की अध्यक्षता रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने की । कार्यक्रम में अमिटी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. पीयूष कांत पाण्डेय, CREDAI के अध्यक्ष श्री पंकज लाहोटी, छत्तीसगढ़ चौंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश अध्यक्ष श्री अमर परवानी, नगरीय प्रशासन विभाग, श्रम विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र, हेल्पएज इंडिया, अविनाश ग्रुप, अल्ट्राटेक सीमेंट के पर्यावरण प्रमुख, त्ड। के आर्किटेक्ट्स, टळत् ग्रुप्स के प्रतिनिधि, नगर निगम के अधिकारी, सफाई कर्मी, अन्य संवेदनशील शहरी श्रमिकों तथा अमिटी यूनिवर्सिटी के शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

संवेदनशील शहरी श्रमिकों मे हीट रेजिलिएंस विकसित करना

यह कार्यक्रम शहरी क्षेत्रों में बढ़ती अत्यधिक गर्मी के प्रभावों तथा हीट-रेजिलिएंट एवं समावेशी रणनीतियों की आवश्यकता पर गंभीर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने इस विषय की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि रायपुर शहर को हीट रेजिलिएंस के दृष्टिकोण से भी “स्मार्ट सिटी” बनाने की दिशा में ठोस प्रयास आवश्यक हैं।

डॉ. पियूष पांडे ने रायपुर की जलवायु परिस्थितियों पर अपने दीर्घकालिक अवलोकनों के आधार पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यद्यपि जैसलमेर जैसे शहरों में दिन का तापमान अधिक रहता है, वहीं रायपुर में रात का तापमान अपेक्षाकृत अधिक दर्ज किया जाता है, जो अक्सर 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहता है। उन्होंने बढ़ते अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव के लिए घटते हरित क्षेत्र, जलाशयों के क्षरण तथा तीव्र शहरीकरण को प्रमुख कारण बताया।

उन्होंने ऐसे तुलनात्मक उदाहरण भी प्रस्तुत किए, जहाँ अनियंत्रित शहरी विस्तार के कारण 10दृ15 वर्षों की अवधि में तापमान में लगभग 5 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि दर्ज की गई। डॉ. पांडे ने ‘वेट-बल्ब टेम्परेचर’ की अवधारणा और उच्च आर्द्रता की स्थिति में उसके मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी चर्चा की।

उन्होंने पारंपरिक वास्तुशिल्प पद्धतियों एवं जीवनशैली आधारित अनुकूलन उपायों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये उपाय ऐतिहासिक रूप से तापीय आराम प्रदान करते थे, लेकिन वर्तमान समय में इन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।

विषय पर नगर निगम रायपुर में राउंडटेबल चर्चा आयोजित   

श्री प्रभात मिश्रा ने कहा कि रायपुर अनेक जलाशयों से समृद्ध शहर है, इसलिए इनके संरक्षण, पुनर्स्थापन और दीर्घकालिक संवर्धन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि जलाशय स्थानीय सूक्ष्म जलवायु (माइक्रोक्लाइमेट) को संतुलित रखने, भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने तथा अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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कार्यक्रम की शुरुआत ब्म्म्क् की एसोसिएट डायरेक्टर , क्लाइमेट चेंज, डॉ. देवयानी शर्मा द्वारा कार्यक्रम के विवरण देते हुए की गई।  उन्होंने रायपुर शहर में बढ़ते हीट स्ट्रेस तथा उसके निर्माण श्रमिकों, सफाई कर्मियों, ठेला एवं फुटपाथ विक्रेताओं, परिवहन कर्मियों और अन्य बाहरी श्रमिक वर्गों पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने बढ़ती हीटवेव परिस्थितियों के बीच जलवायु-संवेदनशील शहरी प्रशासन एवं बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारी की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

शहरी श्रमिक सर्वेक्षण के निष्कर्ष

तकनीकी सत्र के दौरान ब्म्म्क् द्वारा अमिटी यूनिवर्सिटी, रायपुर के विद्यार्थियों के सहयोग से किए गए शहरी श्रमिक सर्वेक्षण के निष्कर्ष डॉ. देवयानी शर्मा द्वारा प्रस्तुत किए गए। सर्वेक्षण में अत्यधिक गर्मी के कारण श्रमिकों पर पड़ने वाले स्वास्थ्य प्रभाव, निर्जलीकरण, कार्यक्षमता में कमी, आय पर प्रभाव तथा सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

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चर्चा के दौरान शहरी हीटवेव प्रबंधन रणनीतियों तथा रायपुर शहर में “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव को कम करने के उपायों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसमें बेहतर शहरी नियोजन, हरित अवसंरचना, कूलिंग इंटरवेंशन तथा हीट-रेजिलिएंट सिटी सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने स्थानीय स्तर पर तैयारी मजबूत करने एवं विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

Raipur Live News : आवश्यक उपायों की महत्ता

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर केंद्रित विशेष सत्र में डॉ. स्मृति देवांगन, जॉइंट डायरेक्टर एवं स्टेट हेल्थ प्रोग्राम ऑफिसर ने शहरी आबादी में हीट स्ट्रेस प्रबंधन पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी, जन-जागरूकता, अर्ली वार्निंग सिस्टम तथा संवेदनशील समुदायों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपायों की महत्ता पर प्रकाश डाला।

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राउंडटेबल चर्चा में शहरी डिजाइन एवं निर्मित अवसंरचना में हीट रेजिलिएंस को शामिल करने, जलवायु-संवेदनशील निर्माण पद्धतियों, श्रमिक-अनुकूल सुविधाओं, शहरी हरित क्षेत्रों के विकास, हीट स्ट्रोक की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया तथा टिकाऊ कूलिंग उपायों जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों के बीच हुई खुली चर्चा में रायपुर (Raipur Live News ) को अधिक हीट-रेजिलिएंट शहर बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव, अनुभव एवं चिंताएँ साझा की गईं। कार्यक्रम का समापन प्रमुख निष्कर्षों, भविष्य की कार्ययोजना तथा नीति-स्तर पर सहयोगात्मक प्रयासों पर चर्चा के साथ हुआ। अन्त मे श्री तुषार शर्मा द्वारा सबका आभार व्यक्त किया गया।