Religion

nagnechya mata temple History : राठौड़ राजवंश की कुलदेवी

nagnechya mata temple History : राजस्थान के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी चक्रेश्वरी, राठेश्वरी, नागणेची या नागणेचिया के नाम से प्रसिद्ध थीं। Nagnechi Mata Temple : नागणेचिया माता का मंदिर राजस्थान के जोधपुर जिले के नागाणा गाँव में स्थित था। यह मन्दिर जोधपुर से 96 किमी. की दूरी पर स्थित था। प्राचीन ख्यातियों और इतिहास ग्रंथों के अनुसार, मारवाड़ के राठौड़ राज्य के संस्थापक राव सिन्हा के पौत्र राव धूहड़ ने सर्वप्रथम इस देवी की मूर्ति स्थापित कर मंदिर बनवाया था।

कर्नाटक से लाई गई थी नागणेची माता की प्रतिमा

राजा राव धूहड़ दक्षिण के कोंकण (कर्नाटक) में जाकर अपनी कुलदेवी चक्रेश्वरी की मूर्ति लाई और उसे पचपदरा से करीब 7 मील पर नागाणा गाँव में स्थापित किया, जिससे वह देवी नागणेची नाम से प्रसिद्ध हुई।

Nagnechya Mata Temple History :

नागणेचिया माता के मंदिर का प्रचलित इतिहास में एक रोचक घटना है। एक बार, राव धुहड़ जी ननिहाल गए और वहां उन्होंने अपने मामा के बड़े पेट को देखा। इस पर उनकी हंसी ने मामा को गुस्सा दिलाया, और मामा ने कहा कि तुम्हारा कुलदेवी का दर्शन नहीं होता और तुम्हारे परिवार को सब हंसते हैं। इसके बाद, राव धुहड़ ने कुलदेवी की मूर्ति लाने का निश्चय किया और इसके लिए तपस्या की।

तपस्या के दौरान, बालक राव धुहड़ जी ने देवी से मिलने का संकल्प किया। एक दिन, वह नीम के वृक्ष के नीचे तपस्या कर रहे थे, और अचानक देवी प्रकट हो गईं। देवी ने उन्हें अपनी कुलदेवी का नाम बताया और उन्हें सूचना दी कि मूर्ति कन्नौज में है और उसे लेकर आने के लिए तपस्या करनी होगी।

Nagnechya Mata Mandir Trust kalyanpur nagana

राव धुहड़ जी ने देवी के आदेश का पालन करते हुए मूर्ति को लाने के लिए कई परिक्रमाएं कीं और अन्त में प्रतिमा को नीम के नीचे स्थापित किया। इसके बाद, एक रोचक घटना हुई, जिसमें देवी ने ग्वालिये से आवाज रोकने की आदान-प्रदान करने के लिए कहा था। ग्वालिये ने गायों को रोकने के लिए हाक की आवाज निकाली, और इसके साथ ही मूर्ति पूर्णतः प्रकट हो गईं।

कुलदेवी ने राव धुहड़ जी को आशीर्वाद दिया और उन्हें अगले दिन से मूर्ति को लेकर उनके परिवार के साथ वापस जाने की अनुमति दी। इस प्रकार, नागणेचिया माता का मंदिर राजस्थान में एक रोचक और भक्तिपूर्ण स्थान बन गया।

भक्ति, श्रद्धा, और माता की कृपा से हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं। यह हमें धार्मिकता और आत्मविश्वास की महत्वपूर्णता को समझाती है और हमें यह भी दिखाती है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी भक्ति के माध्यम से अपने लक्ष्यों की प्राप्ति कर सकता है।

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