Religion

sankranti 2023 : मकर संक्रांति 2023 क्यों मनाया जाता है? जानिये

Makar Sankranti History

Sankranti 2023  : मकर संक्रांति त्यौहार को देश के हर हिस्से में मनाया जाता है. ही नहीं बल्कि अन्य देश जैसे ( नेपाल, बांग्लादेश, थाईलैंड, लाओस, म्यांमार जैसे देशों में और प्रवासी भारतीयों द्वारा मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर्व क्यों मनाया जाता है?

makar sankranti 2023 tithi ? मकर संक्राति 2023 कब है? Makar Sankranti 2023 Kab Hai ? मकर संक्रांति पर्व की कथा क्या है? मकर संक्रांति पर्व की कहानी क्या है? makar sankranti 2023 day आज हम आपको बता रहे हैं। तो पूरा पोस्ट पढ़िये और इस बारे में जानिये।

मकर संक्रांति में करते हैं लोग स्नान 

makar sankranti 2023 in hindi – मकर संक्रांति के बारे में एक और बात यह है कि संक्रांति को लोग पवित्र नदियों में स्नान करते है. मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य धनु राशि से बाहर निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है. हिंदू धर्म में इस त्यौहार बहुत महत्व है.      ( makar sankranti also called) इस लोग खिचड़ी के त्यौहार के नाम से भी जानते हैं.

Sankranti In India – यह त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार हर साल 14 या 15 जनवरी को पड़ता है.

makar fastival – आइए जानते हैं इस साल किस दिन है मकर संक्राति का त्यौहार और क्या है महत्व? है आपकी जानकारी के लिये आपको इस पोस्ट में बताया जा रहा है।

मकर संक्रांति 2023 मकर संक्रांति का महत्व

makar sankranti 2023 day :  संक्रांति को उत्तरायण के नाम से जाना जाता है मान्यता है सूर्य भगवान धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं भगवान सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना के साथ साथ मकर संक्रांति पर तिल का दान अवश्य करना चाहिए. इसके अलावा इस दिन खिचड़ी भी खाई जाती है। इस दिन गंगा स्नान करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है. यदि आप मकर संक्रांति पर गंगा स्नान न कर पाएं तो पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर नहाये जरूर। इस दिन सूर्यदेव से जुड़े मंत्रों का जाप किया जाता है। ऐसा करने से सूर्य की कृपा होती है और आपके जीवन के सभी ग्रह दोष दूर हो जाते है.

मकर संक्रांति 2023 कब है ? (Festival Makar) 

Makar Sankranti 2023 Date – उदया तिथि के अनुसार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी. मकर संक्रांति के त्यौहार के अवसर पर पाठकों यहॉ पर आपको बताया जा रहा है कि सूर्य को अर्ध देना काफी शुभ होता है. ज्योतिष काल गणना के अनुसार शुभ मुहूर्त 15 जनवरी को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर शाम के 5 बजकर 41 मिनट तक रहेगा. makar sankranti festival मकर संक्रांति का पुण्य काल मुहूर्त : 07:15:13 से 12:30:00 तक है. वहीं इस दिन महापुण्य काल मुहूर्त : 07:15:13 से 09:15:13 तक है. इन मुहूर्तों में दान-पुण्य और पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी ऐसा ज्योतिष काल गणना व पंचाग के आधार पर बताया जा रहा है।

मकर संक्रांति 2023 कब हैं, महत्व, शुभ मुहूर्त और कथा | 

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व (Makar Sankranti Significance )

why do we celebrate makar sankranti in hindi – मकर संक्रांति का अधिक वैज्ञानिक महत्व यह है कि मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण होते हैं. सर्दियों के सीजन में रात लंबी और दिन छोटा होता है. लेकिन इस मकर संक्रांति के दिन से रात छोटी और दिन बड़ा होने लगता है. makar sankranti 2023 meaning – मान्यता के अनुसार इस दिन से ठंड कम होने की शुरुआत हो जाता है। makar sankranti 2023 holiday यानी मकर संक्रांति पूरे विश्व में एक खास दिन होता है।

मकर संक्रांति की पौराणिक कथा: Makar Sankranti History

Makar Sankranti History

मां गंगा को स्वर्ग से धरती पर….

story of makar sankranti – मकर संक्रांति के संबंध में मान्यता है की तीनों लोकों के साथ चारों दिशाओं में काफी प्रसिद्ध प्राचीन समय में सगर नाम के प्रतापी राजा थे जिनको हम भगीरथ के नाम से भी जानते हैं राजा सगर ने अपने राज्य में एक अश्वमेघ यज्ञ करवाया। कई देशों के राजा शामिल हुए जिसमें इंद्र भी आए। जब यज्ञ की पूजा समाप्त हुई और घोड़े को छोड़ा गया तो देवताओं के राजा इंद्र ने घोड़ा चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बाँध दिया। जब राजा सगर को इस बात की सुचना हुई तो उन्होंने अपने सभी साठ हजार पुत्रों को घोड़े की खोज के लिए भेज दिए। अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को खोजते हुए जब राजा सगर के सभी पुत्र कपिल मुनि के आश्रम में पहुंचे थे।
Makar Sankranti – कपिल मुनि आश्रम में उनके द्वारा अश्वमेघ यज्ञ की पूजा के छोड़ा गया घोड़ा बंधा था तो राजा सगर ने पुत्रों ने कपिल मुनि पर घोड़ा चोरी करने का आरोप लगाया तो इस झूठे आरोपों के कारण कपिल मुनि बहुत ने अपनी तपशक्ति से श्राप देकर राजा के पुत्रों को जलाकर भस्म कर दिया। जब इस घटना के बारे राजा सगर को पता चला तो वह तुरंत ही भागकर कपिल मुनि के आश्रम आए।

maa ganga aur bhagirath ki kahani

राजा सगर ने आश्रम पहुंचकर कपिल मुनि से अपने पुत्रों को जीवनदान मांगा परंतु यह नहीं हो सका। आखिरार कपिल मुनि ने कहा की आप स्वर्ग में बहने वाली मोक्षदायिनी मां गंगा को स्वर्ग से धरती पर ले आएं। तब गंगा को धरती पर उतारने के लिए राजकुमार अंशुमान कड़ी तपस्या करने लगे। राजा सगर (भगीरथ) (bhagirathi ki kahani )को कड़ी तपस्या करनी पड़ी। अपने कठिन तप से राजा सगर (भगीरथ) ने मां गंगा को प्रसन्न कर दिया। गंगा सामान्य रूप में पृथ्वी पर अवतरित हो गई इसके बाद ही 60 हजार पुत्रों को मोक्ष प्रदान किया कपिल मुनि ने उस दिन मकर संक्रांति का त्योहार था ।
( why is makar sankranti celebrated )आपको यहॉ पर जानकारी अच्छी लगी हो तो जुड़े रहिये जनता पोस्ट से ।

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और विभिन्न जानकारियों पर आधारित है. जनता पोस्ट डाट इन इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

यह भी पढ़े : Sita Navami 2023: जानकी माता का नाम कैसे पड़ा सीता, जानिये

Ramsetu Bridge : रामसेतु से जुड़े रिसर्च

शबरी की नगरी shivrinarayan

वल्लभाचार्य कहाँ रहते थे? जब माता-पिता चले गये…..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button