
रायपुर/ Jantapost News Report : तेलीबांधा तालाब के पास विनायक दामोदर सावरकर की मूर्ति लगाने के प्रस्ताव का कांग्रेस ने विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि तेलीबांधा तालाब छत्तीसगढ़ (Telibandha Talab Raipur ) की धरोहर है। छत्तीसगढ़ के लोगों विशेषकर साहू समाज की भावनायें तेलीबांधा तालाब से जुड़ी हुई है। यहां पर नाम भक्त माता कर्मा या तेलिन दाई की मूर्ति लगाई जाए।
क्या छत्तीसगढ़ में विभूतियों की कमी
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जो सावरकर गाय को गौमाता मानने का विरोध करते थे तथा गाय को एक चौपाया जानवर के अतिरिक्त कुछ नहीं मानते थे, उनको भाजपा, आरएसएस जबरिया हिन्दुत्व का पैरोकार बनाती है।
सावरकर ने जेल से छूटने के लिए तथा जेल से छूटने के बाद आजादी की लड़ाई का भी विरोध किया था। गांधी जी और कांग्रेस का विरोध करने मात्र के लिए भाजपाई उनको महिमा मंडित करते है। उनकी मूर्ति तेलीबांधा तालाब में लगाया जाना गलत है। प्रदेश के सबसे बड़े समाज की भावनाओं का अपमान भी है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि विनायक सावरकर की मूर्ति तेलीबांधा तालाब पर लगाये जाने का कोई भी उचित कारण नहीं है। अंग्रेजी सरकार से माफी मांगने वाले, अंग्रेजी सरकार से वजीफा लेने वाले माफीवीर की मूर्ति की जरूरत छत्तीसगढ़ में नहीं है। छत्तीसगढ़ से अनेकों महापुरूषों ने देश की आजादी की लड़ाई में योगदान दिया है, उनके नामों पर प्रदेश में मूर्ति लगायें। छत्तीसगढ़ में विभूतियों की कमी नहीं है।
माफीवीर वीर सावरकर की मूर्ति क्यों : Congress
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सावरकर को अंग्रेजी सरकार ने 1911 में उन्हें अंडमान की जेल में डाल दिया गया। उन्हें 50 वर्षों की सज़ा हुई थी, लेकिन सज़ा शुरू होने के कुछ महीनों में ही उन्होंने अंग्रेज़ सरकार के समक्ष याचिका डाली कि उन्हें रिहा कर दिया जाए। इसके बाद उन्होंने कई याचिकाएं लगाईं। अपनी याचिका में उन्होंने अंग्रेज़ों से यह वादा किया कि ‘यदि मुझे छोड़ दिया जाए तो मैं भारत के स्वतंत्रता संग्राम से ख़ुद को अलग कर लूंगा और ब्रिटिश सरकार के प्रति अपनी वफ़ादारी निभाउंगा।’ अंडमान जेल से छूटने के बाद उन्होंने यह वादा निभाया भी और कभी किसी क्रांतिकारी गतिविधि में न शामिल हुए, न पकड़े गए।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जेल के दिनों में सावरकर ने अंग्रेज़ों से 11 बार माफ़ी मांगा था। सौंपे गये अपने माफ़ीनामे में लिखा था, ‘अगर सरकार अपनी असीम भलमनसाहत और दयालुता में मुझे रिहा करती है, मैं यक़ीन दिलाता हूं कि मैं संविधानवादी विकास का सबसे कट्टर समर्थक रहूंगा और अंग्रेज़ी सरकार के प्रति वफ़ादार रहूंगा।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जेल से माफ़ी मांग कर छूटने के बाद सावरकर को ब्रिटिश सरकार के द्वारा प्रत्येक माह एक तोला सोना बतौर वजीफ़ा के रूप में मिलता था, जिसे संबंधित कलेक्टर से वजीफ़ा बढ़ाने को कहा इस पर कलेक्टर ने उत्तर देते हुए कहा कि तुम्हें मेरी तनख्वाह से ज्यादा वजीफा मिलता है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि महात्मा गांधी जी की हत्या में विनायक दामोदर सावरकर भी नाथूराम गोडसे के साथ सह अभियुक्त थे जो सबूतो के अभाव में छूट गये थे, बाद में भारत के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाया यह कहते हुए कि यह देश और समाज के लिए घातक संस्था है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना के पहले 30 के दशक में हिन्दू महासभा की बैठक में सावरकर द्वारा ही सबसे पहले ‘द्विराष्ट्र का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था।





