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Coal Production : कोयले का उत्पादन : बढ़ोतरी में कदम बढ़ाता भारत

कोयले का उत्पादन (Coal Production) आज इस लेख में बताया जा रहा है कि कैसे भारत आने वाले समय में कोयला उत्पादन में नया आयाम लिखेगा और उत्पादन के मामले में भारत ने जो किया है उससे कई ज्यादा अब होने वाला है तो पूरे लेख में जानिये ये बातें –

भारत की ऊर्जा मांग में तेजी से बढ़ोतरी के साथ, सरकार ने एक बड़ी कड़ी का एलान किया है – कोयले का उत्पादन बढ़ाने की योजना। अनुमान है कि 2029-30 तक कोयले का उत्पादन 1.5 बिलियन टन तक पहुंच जाएगा, जिससे देश की ऊर्जा स्वार्थ सुनिश्चित हो सकेगी। इस बड़े कदम के साथ, कुछ महत्वपूर्ण पहलूओं को आगे बढ़ाते हुए, देश ने नई रेल परियोजनाओं और फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजनाओं के माध्यम से मशीनीकृत कोयला लोडिंग के लिए कदम उठाने का निर्णय लिया है। तो देखा आने बिलियन में कैसे भारत की कोयला क्षेत्र में तरक्की होगी ।

पर्यावरण की रक्षा के साथ अग्रणी आगे:

इस योजना के अंतर्गत, पर्यावरण की मानकों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। नई खदान खोलने से पहले, विभिन्न नियामक एजेंसियों से पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी), वानिकी मंजूरी (एफसी), सीटीई, सीटीओ प्राप्त की जाएगी। सभी खदानों को शुरू होने से पहले भूजल निकालने के लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से एनओसी प्राप्त होगी। इसके अलावा, ईसी, सीटीई, सीटीओ शर्तों के अनुपालन में परिवेशी वायु गुणवत्ता, प्रवाह गुणवत्ता, ध्वनि स्तर की निगरानी तथा भूजल (स्तर और गुणवत्ता दोनों) के संबंध में नियमित पर्यावरणीय निगरानी की जाएगी। यानी इससे खदानों को बेहतर तरीके से शोध मिलेगा ।

पर्यावरण की रक्षा के लिए उपाय:

वायु प्रदूषण नियंत्रण: योजना के तहत वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई उपायों का अनुसरण किया जा रहा है।

जल प्रदूषण नियंत्रण: भूजल स्तरों की निगरानी और गुणवत्ता के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों के साथ मिलकर जल प्रदूषण को नियंत्रित करने का कार्य हो रहा है।

ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण: खनन के क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण को कम करने के उपायों का पालन किया जा रहा है।

भूमि सुधार: खदान क्षेत्रों की भूमि सुधार की योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भूजल प्राधिकरण (Central Ground Water Authority) इसके अलावा, सरकार ने सभी खदानों की स्वीकृति पूर्वक तृतीय पक्ष मूल्यांकन करने का भी निर्णय लिया है, ताकि सभी प्रमुख पहलूओं की ध्यानपूर्वक राय ली जा सके। यह साबित करता है कि बढ़ती मांग के साथ-साथ, पर्यावरण की रक्षा भी सरकार की प्राथमिकता है।

कोयले का उत्पादन: स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम और

उपरोक्त योजना और निर्णय भारत को ऊर्जा स्वार्थी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह साबित करता है कि देश ने अपने आत्मनिर्भरता की दिशा में सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से एक की पहचान की है और यह नई उत्सर्जन प्रक्रियाओं के माध्यम से पर्यावरण को भी ध्यान में रख रहा है। इसी तरह, देश ने बुढ़ापे के साथ एक नए युग की शुरुआत की है, जिसमें कोयले का उत्पादन बढ़ाकर, विकास की राह में मजबूत और साफ संकेत मिलता है। Coal Production की बात हो और कोयले का उत्पादन जो बढ़ोतरी में दिख रहा है तो इससे यह बात तो स्पष्ट है कि भारत ने नई बुलंदी छूई है। बढ़ाता भारत यह लेख कैसा लगा इसकी राय आप हमें जरूर नीचे लिखे ।

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